Thursday, April 18, 2019

मैं मोहब्बत हूँ.....

मैं मोहब्बत हूँ मोहब्बत करके देख,
मैं मोहब्बत ना दूं तो कहना,
मैं मुस्कुराहट हूँ मुझे हँसा कर देख,
ना सजूँ तेरे होठों पर तो कहना,
मैं ख़ुशबू हूँ मुझे महसूस करके देख,
ना महकूँ तेरी जिन्दगी में तो कहना,
मैं दिल हूँ मुझे सुन कर देख,
ना धड़कू तेरे दिल में तो कहना,
मैं फूल हूँ मुझे लगा कर देख,
ना महकूँ दिन रात तो कहना,

मैं सुकून हूँ गले लगा कर तो देख, 
चैन न मिले तो कहना, 
मैं हवा का झोका हूँ महसूस करके देख, 
आराम न मिले तो कहना,
मैं एक कविता हूँ सुन कर तो देख ,
दिल न लग जाये तो कहना ,
मैं एक कहानी हूँ अपना कर देख ,
प्यार और न हो जाये हमसे तो कहना ,
मैं नदी का किनारा हूँ आकर तो देख ,
ज़िन्दगी न बहले तो कहना ,
मैं एक आग का दरिया हूँ जलकर तो देख ,
प्यार में ज़िन्दगी  न मिले तो कहना,
मैं साहिल हूँ चल रहा हूँ तू भी साथ चल कर देख ,
दुनिया प्यारी न लगे तो कहना ,
मैं एक वरमाला हूँ फूलों का पहन कर देख ,
ज़िन्दगी भर साथ न निभाऊं तो कहना ,
मैं मोहब्बत हूँ मुझे अपना कर देख,
ना बनूँ मैं तेरा तो कहना


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Wednesday, April 17, 2019

Lamha Lamha.....

बहुत खूबसूरत हो ......

बहुत लगती हो 
जब रोकती हो तुम 
बुदबुदाते शब्दों को 
अपने कोमल होंठों के बीच, 

जब तुम्हारी आंखों का पानी 
पलकों की कोर छू कर 
लौट जाता है 
बहने लगता है भीतर उतर कर 
तब भी, 
और जब तुम्हारे होंठों के किनारे 
हल्के से सिकुड़ कर फैल जाते हैं 
तब बहुत खूबसूरत लगती हो। 

तब भी तुम खूबसूरत लगती हो 
जब मेरे किसी कड़वे वचन से 
तुम्हारी गुलाबी आंखों में 
बनने लगते हैं बरबस ही लाल डोरे 
और हां, तब भी तुम खूबसूरत लगती हो 
जब मेरी दूरी के अहसास मात्र से 
बदलने लगता है तुम्हारे चेहरे का रंग। 

जब गुस्से से तुम्हारे गाल दहकते हैं 
और गले में लफ्ज अटकते हैं, 
तुम शायद विश्वास नहीं करोगी, उस वक्त भी तुम खूबसूरत लगती हो। 
सच यह है कि 
हमारे-तुम्हारे बीच 
यह जो का नवांकुर फूटा है 
इसने मेरे भीतर 
इतने रंग, 
इतनी सुगंध 
और इतनी खूबसूरती भर दी है कि तुम हर रूप में मुझे खूबसूरत ही लगती हो। 

पता नहीं। अभी तो इस कविता के हर शब्द में तुम खूबसूरत लग रही हो।


Monday, April 15, 2019

तू अच्छी लगती है.....

कह दूँ आज सारी दिल की बाते
तू अच्छी लगती है
तेरी बाते अच्छी लगती है
तेरा रोना अच्छा लगता है
तेरा हँसना अच्छा लगता है
तेरा चलना अच्छा लगता है
तेरी गाली अच्छी लगती है
तेरा देखना अच्छा लगता है
तेरी नराजगी भी अच्छी लगती है
तेरी सूरत अच्छी लगती है
तेरी मुस्कान अच्छी लगती है
तेरी आँखे अच्छी लगती है
तेरा मारना अच्छा लगता है
तेरा घूरना अच्छा लगता है
तेरी दी हुई चीजें अच्छी लगती है
तेरे बालो की पीन अच्छी लगती है
मिर्ची खाकर रोना अच्छा लगता है
तेरा सारी चॉकलेट्स अच्छा लगता है
तेरी जूती अच्छी लगती है
तेरा सूट भी अच्छा लगता है
तेरे नखरे अच्छे लगते है
तेरी याद मे रोना अच्छा लगता है
तेरा करीब आना अच्छा लगता है
दुरिया को छोड़ बाकी सब अच्छा लगता है
तेरे पास बैठना अच्छा लगता है
तेरे साथ रोना अच्छा लगता है
तेरे साथ हँसना अच्छा लगता है
तेरे साथ चलना अच्छा लगता है
तुझे  मारना अच्छा लगता है
तेरी तड़प अच्छी लगती है
तेरी रन्गत अच्छी लगती है
तुझे डायरी मे लिखना अच्छा लगता है
तेरी तस्वीरे अच्छी लगती है
तेरी गलती अच्छी लगती है
तू सही है अच्छी लगती है
तेरा चिल्लाना अच्छा लगता है
तेरा चुप रहना अच्छा लगता है
तुझे  हँसाना अच्छा लगता है
पर इन सब से एक अलग एक और
तेरा गुस्सा
अब तो तेरा गुस्सा भी अच्छा लगता है
वजह ना पूछना तू मेरी जाना
बस तुम और सिर्फ तुम अच्छे लगते हो
पागल था या पग्ला गया हूँ मालूम नहीं
गलत था या गलत हू मालूम नहीं
अब और क्या कहूं मैँ
बस तू अच्छी लगती है
तू अच्छी लगती है
और तू ही अच्छी लगती है..............

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Friday, April 12, 2019

एक लड़की है जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती है......

जो लब्ज जुबा तक नहीं आते मेरे,
वो उन्हें भी पहचानती है.
एक लड़की है जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती है.


सूझ-बूझ में मुझसे आगे है.
वो थम जाती है जब दुनिया भागे है.
मसरूफ रहती है,
न जाने किस गाँव में त्यौहारों में,
पायल पहनती है वो अपने पावों में.

मेरी कहानियों को बड़े इतमिनान से सुनती है.
मेरे शब्दों पर पलकें रख, 
शायद वो भी ख्वाब बुनती है कुछ.
कुछ छिपाता हूं उसे न जाने कैसे जान जाती है हर बार.

हर बार मेरा मखौटा हटा कर,
मेरी सच्चाई पहचान जाती है.
उसे रास्तों की परवाह नहीं है, 
वो खुद को लहर मानती है.
एक लड़की है जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती है.

मै न सुनूँ तो गुस्से में आती है.
मै सुन लूं तो मुस्कुराती है,
मै उदास हूं तो समझाती है,
मै चुप हूं तो सहलाती है.
मै खफा हूं तो न ही मुझे मनाती है.
मेरी नाकामियों पर अपना हक जताती है.

थोड़ी प्यारी  है,  गाकर सुनाती है.
मै परेशान न करूँ तो परेशान हो जाती है.
इतनी तिलिस्मानी होकर भी मुझे वो अपना  मानती है.
एक लड़की है जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती है.

हां, हां मैं उससे मजाक बेहद करता हूं,
पर उसे खोने से डरता हूं.
उसकी नापसंद भी मुझे पसंद है,
उसकी आवारगी में मेरी आजादी बंद है.

मै शब्द रखता हूं वो जज्बात  उठाती है,
मेरे कोरे कागजों पर किसी कविता सी उतर जाती है.
पर पूरी कविता में भी वो कहाँ खरी उतरती है,
रोज-रोज भला जन्नत से कहाँ ऐसे परी उतरती है.

मै उम्मीद न तोड़ दूं इसलिए मेरा हाथ थामती है.
मुझसे ज्यादा मेरे सपनों को वो हकीकत मानती है.
उसे रास्तों की परवाह नहीं है, 
वो खुद को लहर मानती है.
एक लड़की है जो मुझे मुझसे ज्यादा जानती है.....


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Monday, December 31, 2018

Nav Varsh Vishesh


दोस्तों २०१९ की पूर्व संध्या पर कुछ लाइन्स प्रस्तुत की हैं काफी दिन बाद .....
happy New Year 2019


बीते वर्ष में बहुत कुछ खोया बहुत कुछ पाया .
एक बार फिर से नया वर्ष २०१९ आया
उमंग नयी होगी उल्लास नए होंगे
सपनें नए होंगे अपने वही होंगे
रिक्वेस्ट आप से यही है आप यूँ  ही रहना
नए मुकामों को यूँ ही पाते रहना
दुआ करते  हैं हर पल आपका सुहावना हो
मंजिल मिलती रहे कभी आपको भय ना हो
इस नव वर्ष में यही कहूंगा
जीवन में आप खुश रहोगे तो मैं खुश रहूंगा
नव वर्ष की हार्दिक बधाई ......

सिद्धांत प्रताप सिंह
नई दिल्ली भारत


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Friday, August 17, 2018

Mujhe Yaad Karna.....

जब तुम तन्हा हो जाओ, तब मुझे याद करना,
जब तुम इतने ख़ूबसूरत न रहो, तब मुझे याद करना,
जब तुम्हारी मुस्कान की कोई तारीफ न करे, तब मुझे याद करना,
जब तुम ज़िन्दगी से परेशान हो जाओ, तब मुझे याद करना,
जब तुम अपना सारा प्यार लुटा दो और तुम्हे प्यार न मिले, तब मुझे याद करना,
जब तुम दूसरो की खुशियों के लिए अपने खुशियों को कुर्बान कर दो, तब मुझे याद करना,
जब तुम्हारी चाहतों को कोई समझने वाला न हो, तब मुझे याद करना,
तब भी मैं तुम्हे इतना ही प्यार करूँगा,
तुम्हारी मुस्कान के खातिर खुद को गिरवी रख दूँगा.
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Sunday, March 11, 2018

रिश्ते क्या हैं नहीं पता ......

अक्सर रिश्तों को रोते हुए देखा है, 
अपनों की ही बाँहो में मरते हुए देखा है
टूटते, बिखरते, सिसकते, कसकते 
रिश्तों का इतिहास, 
दिल पे लिखा है बेहिसाब! 
प्यार की आँच में पक कर पक्के होते जो, 
वे कब कौन सी आग में झुलसते चले जाते हैं,
झुलसते चले जाते हैं और राख हो जाते हैं! 
क्या वे नियति से नियत घड़ियाँ लिखा कर लाते हैं?
कौन सी कमी कहाँ रह जाती है 
कि वे अस्तित्वहीन हो जाते हैं, 
या एक अरसे की पूर्ण जिन्दगी जी कर,
वे अपने अन्तिम मुकाम पर पहुँच जाते हैं! 
मैंने देखे हैं कुछ रिश्ते धन-दौलत पे टिके होते हैं,
कुछ चालबाजों से लुटे होते हैं-गहरा धोखा खाए होते हैं 
कुछ आँसुओं से खारे और नम हुए होते हैं,
कुछ रिश्ते अभावों में पले होते हैं- 
पर भावों से भरे होते है! बड़े ही खरे होते हैं ! 
कुछ रिश्ते, रिश्तों की कब्र पर बने होते हैं,
जो कभी पनपते नहीं, बहुत समय तक जीते नहीं 
दुर्भाग्य और दुखों के तूफान से बचते नहीं!
स्वार्थ पर बनें रिश्ते बुलबुले की तरह उठते हैं 
कुछ देर बने रहते हैं और गायब हो जाते हैं; 
कुछ रिश्ते दूरियों में ओझल हो जाते हैं,
जाने वाले के साथ दूर चले जाते हैं ! 
कुछ नजदीकियों की भेंट चढ़ जाते हैं,
कुछ शक से सुन्न हो जाते हैं ! 
कुछ अतिविश्वास की बलि चढ़ जाते हैं! 
फिर भी रिश्ते बनते हैं, बिगड़ते हैं, 
जीते हैं, मरते हैं, लड़खड़ाते हैं, लंगड़ाते हैं
तेरे मेरे उसके द्वारा घसीटे जाते हैं,
कभी रस्मों की बैसाखी पे चलाए जाते हैं!

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पर कुछ रिश्ते ऐसे भी हैं 
जो जन्म से लेकर बचपन जवानी - बुढ़ापे से गुजरते हुए,
बड़ी गरिमा से जीते हुए महान महिमाय हो जाते हैं ! 
ऐसे रिश्ते सदियों में नजर आते हैं ! 
जब कभी सच्चा रिश्ता नजर आया है
कृष्ण की बाँसुरी ने गीत गुनगुनाया है! 
आसमां में ईद का चाँद मुस्कराया है! 
या सूरज रात में ही निकल आया है! 
ईद का चाँद रोज नहीं दिखता,
इन्द्रधनुष भी कभी-कभी खिलता है! 
इसलिए शायद - प्यारा खरा रिश्ता 
सदियों में दिखता है, मुश्किल से मिलता है पर, 
दिखता है, मिलता है, यही क्या कम है .. !!!

Thursday, March 8, 2018

Woman's Day Vishesh...

आज की बिटिया कल की नारी है। वही इंदिरा, दुर्गा, लक्ष्मी, किरन, अन्नपूर्णा और जग कल्याणी है। इनकी अपनी अलग कहानी है, बिटिया के जन्म का उत्सव मनाओ। पढ़ा-लिखाकर उसे काबिल बनाओ॥ बेटा-बिटिया में भेद-भाव करना सरासर अन्याय है, इसी भेद-भाव के कारण तो आज इनका घटता अनुपात है। उनमें से तो कुछ चढ़ा दी जाती है, दहेज की बलि, कुछ कुपोषण के कारण खिलने से पूर्व ही मुरझाती है कली, कुछ होती जा रही हैं दुराचार और शोषण की शिकार॥ Image result for women's day यदि ऐसे ही घटता रहा इनका अनुपात, तो घर-परिवार और देश को चलाएगा कौन? सोचो ज़रा सब तरफ बढ़ेगा अत्याचार और बलात्कार। जैसे एक पहिए से गाड़ी नहीं चल पाएगी, वैसे ही नारी के बिना क्या यह दुनिया चल पाएगी? जैसे नल होगा बिना पानी के , वैसे ही नर रहेगा बिना नारी के। नारी ही तो है जन-जन की जननी, वही रखती ख्याल सबका दिन-रात॥ नारी ही तो चलाती है, घर, समाज, देश और संसार। नारी से बढ़कर कोई नहीं, इनकी महिमा अपरंपार॥ जहाँ इनको मिलता है सम्मान, वहीं रमते हैं श्री भगवान। हर जन, समाज, और सरकार से है विनती हमारी। लड़कियों को सबल बनाएँ, और दें इन्हें सुविधाएँ सारी॥ पढ़ी-लिखी बालिका पर ही टिकी हैं, परिवार, समाज और देश की उम्मीदें सारी। घर-घर में होता है दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का अवतार, यह कथा नहीं सच्चाई है, इसे स्वीकारने से मत करें इनकार॥ इस धरती को स्वर्ग बनाओ, बिटिया को सँवारो, पढ़ाओ और सबल बनाओ। बिटिया के जन्म का उत्सव मनाओ, पढ़ा-लिखाकर उसे काबिल बनाओ॥


Saturday, March 3, 2018

Dil ka khayal-001

Khayal Tear Muskurahat Lata hai,
Teri Aashqui me doob jane ka dil chahta hai,
Afosos nhi hoga agar tujhe paa na Saka,
Khush rhunga humesa ki mujhe bhi koi chahta tha.....


Zindagi Nirali Hai kyunki ye har sama ki deewani hai,
Chahat kashish aur pyar mohabbat hote hai ek dhage ki tarah,
toot jaye to nhi jud nhi sakte kabhi,
Par majboot ho jaye to Koi tod nhi sakta...

Meri chahat ki deewangi humesa fikr se nhi hoti,
Waqt k sath zindagi humesa bhi buri nhi hoti,
Paa lunga mai ek din apne us mukaam ko jiski chahat hai,
Kyunki dillagi ki kbhi kbhi alag entry bhi hoti hai,

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Junoon ho agar kuch paane ka,
waqt ho agar kuch ban k dikhane ka,
Kosis kro tum kar jaoge ,
Saari duniya se lad jaoge ,
waqt bewaqt hi shi ek din tum bhi mahan kahlaoge,
koi nhi harata iss duniya me sab jeet k baajigar hote hain,
badho aur badhte rho duniya ko kuch naya do,
Salam na kre agar koi tumko to phir kho,
bus mehnat ki ek acchi kosis ho,
waqt ki bhi ek acchi frequency ho,
electric jaisi sakti jo ayegi,
to khud hi zindai ki light jal jayegiiiiii


“वो लड़का…”

वो लड़का जो हंसता बहुत है, अंदर से थोड़ा टूटा होता है, दुनिया को मजबूत दिखाने में, खुद से ही रोज़ रूठा होता है। घर की उम्मीदों का बोझ ल...