Sunday, July 25, 2021

ज़िन्दगी का सार..

 ज़िन्दगी भी कैसे कैसे इम्तेहान लेती है,

किसी को रुलाती है किसी को हंसाती है,

कोई अपनों को खो रहा है ,

कोई पैसों के लिए रो रहा है,

हर तरफ यह देखो कैसी खलबली है,

ज़िन्दगी में ये कैसी जलजली है,

हर तरफ जहाँ देखो एक दूसरे पर आरोप लगाते है,

लोग खुद के मन और दिल को क्यों नहीं समझातेे हैं,

अगर हर इंसान ईमानदारी से अपना फ़र्ज़ निभाए,

तो  परेशानी सबकी  जड़ से मिट जाये,

कब अच्छा वक़्त आएगा जब हर इंसान खुश हो जायेगा

सबको अपनी अपनी पड़ी है,

देखो मेरे भगवान आम आदमी की क्या ज़िन्दगी है,

ज़िन्दगी चल नही रही है बस ज़िन्दगी कट रही है,

शायद तेरे होने से लोगों में कुछ तो डर है,

मेरे भगवान पता नहीं जीवन का ये कौन सा कर है,

कोरोना के इस दौर में भी कुछ लोगों ने काला धन कमाया है,

और कुछ ने तो अपना सबकुछ इंसानियत में लुटाया है,

इस 2020-2021 मे भी कुछ मसीहा बनकर आये हैं,

जिन्होंने पैसे नही लोगों के दुआ और आशीर्वाद कमाए हैं,

जिन्होंने इस दौर में अपनों को खोया वो इस दर्द को जानते हैं,

भगवान है वो देख रहा है ये हम सब मानते  हैं

आती है ऊपर वाले को सबकी बिगड़ी बनानी,

वही है जो समझता है हर इंसान के दिल की  दस्तानी,

ज़िन्दगी के इस सार की बस यही है कहानी,

जो सुनाया दिल से हमने अपनी जुबानी,

इस दौर के बाद बनाएंगे कुछ नई नई कहानी,

बदलेंगे खुद को और लोगों को ये है हमने ठानी,

ज़िन्दगी के इस पथ पर बहुत सारी है रवानी,

जिंदगी के सार की बस यही है कहानी.......!!


इतनी सी थी यह कविता मेरी.....


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