Monday, November 13, 2017

New Poem of Important Person....

आत्म मन्थन के क्षण
मत हो राही तू विकल
माना बहुत है हो चुका
बीता जो उस पर रो चुका
किन्तु अब क्यू काल कलवित हो रहा
प्रत्यक्ष बहुत कुछ खो रहा
समय नही स्वर गान का
काल है सन्धान का
प्रत्यंचा को खींच ले
लक्ष्य मुठ्ठी में भींच ले
सो लिया तू बहुत
न समय अब शेष है
भाग्य भरोसे मिलता वही
श्रम बिंदु से जो अवशेष है
तू संकल्प निर्विकल्प कर
मृत्यु तो निश्चित है भन्ते
क्यूँ न तू जी के मर
जीवन संग्राम में भला
हार आई किसे रास है
किन्तु जो न हारा थका
जीत उसकी दास है।।।।

Saturday, October 28, 2017

बराने से मसले हल नहीं होते
जो आज है, वो कल नहीं होते।

ध्यान रखो इस बात का ज़रूर
कीचड़ में सब कमल नहीं होते।

नफ़ा पहुँचाते हैं जो जिस्म को
मीठे अक्सर वो फल नहीं होते।

जुगाड़ करना पड़ता है हमेशा
रस्ते तो कभी सरल नहीं होते।

दर्द की सर्द हवा से बनते हैं जो
वो ठोस कभी तरल नहीं होते।

नफ़रत की खाद से जो पेड़ पनपते हैं
मीठे उनके कभी फल नहीं होते।

जो आपको आपसे ज्यादा समझे
ऐसे लोग दरअसल नहीं होते।।


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Tuesday, September 12, 2017

Jeevan Jeena Padega....

एक सफ़र है जिंदगी
जिसमें मुसाफिर भी हैं
कारवां भी है,
हमसफ़र भी है
मुकाम भी है,
कदम बढ़ाते जाना है
और
मंजिलों को पाते जाना है।
इस सफ़र में
परेशानियों की रात भी होगी
हौसला बनाये रखना
क्योंकि
ग़मों की बरसात भी होगी,
बच कर रहना
कहीं लूट न लें तुझको
ये हमसफ़र तेरे
बर्बाद करने को आतुर
ये कायनात भी होगी।
ठोकरें गिराएंगी
राहें भी आजमाएंगी
हरकतें ज़माने वालों की
उनकी असलियत दिखाएंगी,
संभाल कर रखना कदम
पथ पथरीले हैं,
कहीं घाव न हो जाएँ
वर्ना ये तुम्हारी
तकलीफें बढ़ाएंगी।
कोई धीमे चल रहा है
किसी की चाल तेज है
किसी को अपनी रफ़्तार
बढ़ाने से गुरेज है,
हर कोई पहुँचना चाहता है
सबसे पहले मनिल पर
लेकिन वो पाँव क्यों नहीं बढ़ाता
ये मामला सनसनीखेज है।
इन सब को लेकर कहीं खुशियाँ
और कहीं संजीदगी है,
मौत पर ख़त्म होने वाला
एक सफ़र है जिंदगी।

Friday, September 8, 2017

Jeevan Aur Rishtey....

आकाश से पटल तक
जीव चलता मात्र रिश्तों पर
कुछ लंबे समय तक टिकते हैं
कुछ बीच में दम तोड़ देते हैं
कुछ रिश्ते पैसों से बनते हैं
कुछ प्रेम प्रतीक भी होते हैं
कुछ क्षण भर के,कुछ युग-युग के
रिश्तों पर जीवन टिकता है
रिश्तों से जीवन बनता है
रिश्तों में दरार, विश्वास की कमी
रिश्तों में मिठास, प्रेम अनुभूति
एक जीवन, अनेक रिश्ते
जीवन से जुड़े सारे रिश्ते
निर्जीव सजीव सभी रिश्ते
रिश्तों का प्रतीक, स्वयं रिश्ते

RishteY......

रिश्ते कुछ खास होते हैं
शायद उनकी डोर उस प्रभु के पास होती है
जो वहां है जहां थोड़ी सी हवा है,थोड़ा सा आसमान है
अक्सर राह चलते कुछ रिश्ते हमें पकड़ कर ले जाते हैं वहां
जहां हम कभी नहीं गये होते
हम चीखते हैं कि नहीं जाना चाहते इस जहां को छोड़ कर
मगर एक हवशी ला पटकता है नए दरख्तों के तले
चिल्लप-पों के बीच अपनी ही आवाज लौट कर
दे जाती है दस्तक
आखिर क्यों हमें आज हर रिश्ते से डर लगता है?
रिश्ते तो रुई के फाहे है
फिर क्यों हम उन्हें नासूर समझ कर ठुकरा देते हैं?
शायद यह समय ही ऐसा है कि-
'हमें अपनी ही परछाईं से डर लगता है'
बदहवास से हम घूमते हैं नंगे पांव
शीशे की दीवारों में अपना माथा लटकाए
हम टहलते हैं सिर्फ अपने पुरवे की ओर
अजीब सी खलल मथ डालती है
और उसकी तपिश में हम सोचते हैं-
काश! कोई अपना भी होता ! 

Thursday, August 31, 2017

मानव परिवार


मैं स्पष्ट अंतर ध्यान दें मानव परिवार में हममें से कुछ गंभीर हैं, कुछ कॉमेडी पर कामयाब रहे कुछ अपनी ज़िंदगी घोषित करते हैं सच profundity के रूप में, और दूसरों का दावा है कि वे वास्तव में जीते हैं वास्तविक वास्तविकता हमारी त्वचा की विविधताएं भ्रमित कर सकते हैं, ममता बनना, प्रसन्नता, भूरा और गुलाबी और बेज और बैंगनी, तन और नीले और सफेद मैंने सात समुद्रों पर रवाना किया है और हर देश में बंद कर दिया, मैंने दुनिया के चमत्कार देखा है अभी तक एक आम आदमी नहीं मुझे दस हजार महिलाएं हैं जेन और मैरी जेन कहा जाता है, लेकिन मैंने किसी भी दो को नहीं देखा है जो वास्तव में एक ही थे
Image result for family मिरर जुड़वाँ अलग हैं हालांकि उनकी विशेषताएं हंसी, और प्रेमी बहुत अलग विचार सोचते हैं जबकि एक तरफ झूठ बोल रही है हम चीन में प्यार करते हैं और खो देते हैं, हम इंग्लैंड के मूरों पर रोते हैं, और हनी और गिनी में विलाप, और स्पेनिश किनारे पर पनपे हम फिनलैंड में सफलता की तलाश करते हैं, मेन में पैदा होते हैं और मरते हैं मामूली तरीकों से हम भिन्न होते हैं, प्रमुख में हम वही हैं मैं स्पष्ट अंतर ध्यान दें प्रत्येक प्रकार और प्रकार के बीच, लेकिन हम एक जैसे अधिक हैं, मेरे दोस्त, हम अनगिनत हैं हम एक जैसे हैं, मेरे दोस्त, हम अनगिनत हैं हम एक जैसे हैं, मेरे दोस्त, हम अनगिनत हैं

Tuesday, August 29, 2017

The Tide Rises, the Tide Falls

ज्वार उगता है, ज्वार गिर जाता है,
गोधूलि अंधेरे, कर्ल कॉल;
समुद्र-रेत नम और भूरे रंग के साथ-साथ
यात्री शहर की ओर बढ़ता है,
और ज्वार बढ़ जाता है, ज्वार गिर जाता है
अंधेरे छतों और दीवारों पर बैठ जाती है,
लेकिन समुद्र, अंधेरे में समुद्र;
छोटी लहरें, उनके नरम, सफेद हाथों से,
रेत में पैरों के निशान,
और ज्वार बढ़ जाता है, ज्वार गिर जाता है
सुबह टूटता है; उनके स्टालों में स्टीड्स
डाक टिकट के रूप में टिकट और पड़ोसी;
दिन रिटर्न, लेकिन कभी नहीं
तट पर यात्री लौटाता है,
और ज्वार बढ़ जाता है, ज्वार गिर जाता है..................
By- Henry Wadsworth Longfellow

B

Sunday, August 13, 2017

कुछ बातें हम से सुना कर......

कुछ बातें हम से सुना करो, 
कुछ बातें हम से किया करो । 

मुझे दिल की बात बता दो तुम, 
होंठ ना अपने सिया करो। 

जो बात लबों तक ना आए, 
वो आंखों से कह दिया करो। 

कुछ बातें कहना मुश्किल है, 
तुम चहरे से पढ़ लिया करो। 

जब तनहा-तनहा होते हो, 
आवाज मुझे तुम दिया करो। 

हर धड़कन मेरे नाम करो, 
हर सांस मुझको दिया करो। 

जो खुशियां तेरी चाहत हैं, 
मेरे दामन से चुन लिया करो।

कुछ बातें हम से सुना कर शायरी

Wednesday, June 14, 2017

NA HO SATH TO

न हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुम
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।
सदा जो जगाये बिना ही जगा है
अँधेरा उसे देखकर ही भगा है।
वही बीज पनपा पनपना जिसे था
घुना क्या किसी के उगाये उगा है
अगर उग सको तो उगो सूर्य से तुम
प्रखरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥
सही राह को छोड़कर जो मुड़े
वही देखकर दूसरों को कुढ़े हैं।
बिना पंख तौले उड़े जो गगन में
न सम्बन्ध उनके गगन से जुड़े हैं
अगर बन सको तो पखेरु बनो तुम
प्रवरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥
न जो बर्फ की आँधियों से लड़े हैं
कभी पग न उसके शिखर पर पड़े हैं।
जिन्हें लक्ष्य से कम अधिक प्यार खुद से
वही जी चुराकर तरसते खड़े हैं।
अगर जी सको तो जियो जूझकर तुम
अमरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥

#geetganga

Tuesday, June 13, 2017

something new...

आपके सामने, मैं अकेले इस दुनिया चला गया,
कभी भी सबसे बड़ी अकेलापन ले जाना,
दया की प्रार्थना पत्थर से मेरा दिल बारी,
त्यागकर्ता द्वारा त्याग दिया जा रहा है

मेरी सारी शक्तियों के साथ मेरे दर्द को कैप्चर करना,
केवल रात के शांत में उन्हें मुक्त करने के लिए,
दृष्टि में कोई प्रकाश के साथ मनाया विचार,
मेरी किस्मत को स्वीकार करना मैंने लड़ाई छोड़ दी

निर्माता ने मेरे दिल पर दया की, उसने मुझे मुक्त कर दिया,
उसने मेरी रोता सुनकर मेरी सुनवाई सुनाई,
उसने मुझे सबसे बड़ा उपहार दिखाया, कभी भी हो सकता है,
अभिशाप को तोड़ दिया और मुझे एक पवित्र उपहार भेजा

तुम मेरी रात आसमान हो,
इस तरह की भावनाओं से मैं इनकार नहीं कर सकता,
अब मैं आभारी हूं कि मैं रोता हूं,
आप एक हैं जो मैं ईमानदारी से खड़े होंगे।

जब मैं आपकी आंखों में देखता हूं, तो मैं तुम्हारा प्यार महसूस कर सकता हूं,
मेरे खूबसूरत परी को ऊपर से भेजा गया,
आपका संरक्षक योद्धा जिसे मैंने सपना देखा था,
हमारे जैसे प्रेम कबूतर की तुलना में अधिक शुद्ध है......

Saturday, April 22, 2017

Aahistey chal...

जरा आहिस्ता चल जिन्दगी,
तुझे थोडा जी तो लूँ |

यूँ इम्तेहाँ पे इम्तेहाँ न ले,
तुझे थोडा परख तो लूँ |

तेरे हर पहलु को नजर भर देख लूँ,
थोडी ठहर जरा, तेरी खामोश नजरो के ईशारो से कुछ सीख लूँ |
कभी गिरती तु कभी सम्भलती,
फिर तेज रफ्तार से दोडती,
कभी तन्हा कभी अकेली,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |

कई रूप है तेरे कई रंग तेरे,
हसीनाओं से नखरे तेरे,
यूँ अकेली चलेगी कब तक,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |

मंद शीतल पवन सी तु,
कभी तुफाँ लिए अपने अन्दर,
निर्मल स्वच्छ चाँदनी सी तु,
कभी सूरज की तपन सी लगे,
बिखरी हुई है तु यहां वहां,
थोडी सी जरा तुझे संवार लूँ,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |

क्यों खोई है तु खयालों मे,
भविष्य की आशाओं मे,
जी लेने दे इनपलों को जो आज है,
कहीं कल की आघोश मे ये खो न जाये,
आ हाथ मेरा तु थाम ले,
चल मेरे साथ मे,
कि तेरी खुबसूरती को थोडा निखार लूँ,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |

jee lo,,....

तू जिंदगी को जी,
उसे समझने की कोशिश न कर
सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,
उसमे उलझने की कोशिश न कर
चलते वक़्त के साथ तू भी चल,
उसमे सिमटने की कोशिश न कर
अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले,
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे,
खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर
कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे,
सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर
जो मिल गया उसी में खुश रह,
जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर
रास्ते की सुंदरता का लुत्फ़ उठा,
मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर !

Wednesday, April 12, 2017

Baal Adhikaar.....

बच्चे जग की बडी नियामत

ऐसी भी क्या आई कयामत

इनके नन्हे-नन्हे हाथ

करते रहें काम दिन रात

जूठन मांजें जूठन खाएं

खेल कूद मस्ती को भुलाएं

कभी खडे हो सडक किनारे

माल बेचने लगें बेचारे

कभी करते ये जूते साफ़

ये कैसा इन संग इंसाफ़ ?

बेचें फ़ल पर खुद न खाएं

बोझा कंधों पर उठाएं

कभी भीख में हाथ बढाएं

खेतों में जा काम कराएं

कहां खो गया इनका बचपन ?

मरा हुआ क्यों इनका मन ?

भोलेपन पर भारी काम

बचपन में भी नहीं आराम

नींद चैन और खेल भी खोया

छुप-छुप कर ये कितना रोया

क्यों न किसी नें इनको जाना

प्यारा बचपन न पहचाना

स्कूल और दोस्तों से दूर

क्यों भाग्य इनका क्रूर

आओ मिल अभियान चलाएं

बाल-श्रम को जड से मिटाएं

खो न जाए इनका बचपन

न रोए कोई नन्हामन

भर जाए खुशियों से बचपन

दुनिया का अनमोल रत्न

खो न जाए बाल-मुस्कान

दबें नहीं इनके अरमान

आओ मिलकर करें विचार

इन बच्चों की सुनें पुकार

जीने का इन्हें भी अधिकार

न हो बचपन का तिरस्कार

गया बचपन न लौट के आए

आओ हम बचपन को बचाएं

बाल-श्रम को जड से मिटाएं

आओ मिल अभियान चलाएं

Thursday, March 23, 2017

मैंने ख़ुशी खरीद ली…

रुई का गद्दा बेच कर
मैंने इक दरी खरीद ली,
ख्वाहिशों को कुछ कम किया मैंने
और ख़ुशी खरीद ली ।
सबने ख़रीदा सोना
मैने इक सुई खरीद ली,
सपनो को बुनने जितनी
डोरी ख़रीद ली ।
मेरी एक खवाहिश मुझसे
मेरे दोस्त ने खरीद ली,
फिर उसकी हंसी से मैंने
अपनी कुछ और ख़ुशी खरीद ली ।
इस ज़माने से सौदा कर
एक ज़िन्दगी खरीद ली,
दिनों को बेचा और
शामें खरीद ली ।
शौक-ए-ज़िन्दगी कमतर से
और कुछ कम किये, 
फ़िर सस्ते में ही
“सुकून-ए-ज़िंदगी” खरीद ली ।

खुदा ये बचपन क्यों…

APne Bachpan K naam ye kavita sabko samarpit..

कोई नहीं डांटता किसी को मुझ पर प्यार नहीं आता,
अब वो स्कूल जाने के नाम पर बुखार नहीं आता…
सुबह सुबह आ जाते थे खेलने के लिए बुलाने,
अब तो मिलने को भी कोई यार नहीं आता..
वो पक्के रंग, वो पिचकारियां, वो गुलाल,
अब वो वैसा होली का त्यौहार नहीं आता…
वो करतब जमूरे के, वो साइकल चैम्पियन,
अब गली में कोई ऐसा फनकार नहीं आता…
वो जिद खिलोने की वो चॉकलेट के लिए लड़ना,
अब वो पापा की डांट माँ का इंकार नहीं आता…
वो होमवर्क के लिए मार वो टीचर से चुगली,
खुदा ये बचपन क्यों बार बार नहीं आता…!

चार लोग क्या कहेंगे…

doston ye kavita ek beti ki kwaahish k  naam se dedicate kar rha hu..

बेटी बोली -
माँ मैं क्रिकेटर बनूँगी,
सचिन की तरह रिकॉर्ड तोडूंगी !
माँ बोली -
आहिस्ता बोल सब हसेंगे,
और फिर चार लोग क्याकहेंगे !!
बेटी बोली –
माँ मैं बाबा का व्यापार चलाऊँगी,
छोटी सी दुकान से बड़ा दफ्तर बनाउंगी!
माँ बोली –
आहिस्ता बोल बाबा गुस्सा करेंगे,
और फिर चार लोग क्याकहेंगे !!
बेटी बोली –
तो माँ मैं नेता बन जाऊंगी,
देश की हालत में कुछतो सुधार लाऊंगी !
माँ बोली –
कुर्सी तक पहुँचने से पहले ही सब नोंच लेंगे,
और फिर चार लोग क्याकहेंगे !!
बेटी बोली –
तो माँ मैं क्या करूँ,
बस यूँहीं अपनी ख्वाहिशों को दफ़न करती रहूँ ?
माँ बोली –
बेटी तू शादी करले,
तेरे ससुराल वाले तुझसे खूब मोह जताएंगे !
बेटी बोली –
माँ झूठ न बोल,
ना छीन मुझसे मेरे ये पल अनमोल !
शादी करके मैं फंस जाऊंगी,
सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन कहाऊंगी !
तू कुछ कर ना पाएगी, बेटी परायी होते ही तेरे
हाथ बांध जायेंगे,
मेरे भी हाथ पति और बच्चों के मोह से बांध दिए
जायेंगे !
मेरे सारे सपने शादी के लिबास से दफ़न कर दिए
जायेंगे,
और फिर तेरे वो चार लोग भी मुझे न
बचा पाएंगे !!

Saturday, January 21, 2017

Pyar...ek lafj

कुछ जीत लिखूं या हार लिखूं,या दिल का सारा प्यार लिखूं.
कुछ अपनो के जज़्बात लिखूं या सपनो की सौगात लिखूं.

मैं खिलता सूरज आज लिखूं या चेहरा चाँद गुलाब लिखूं.
वो डूबते सूरज को देखूं या उगते फूल की साँस लिखूं.

वो पल मैं बीते साल लिखूं या सदियों लंबी रात लिखूं.
मैं तुमको अपने पास लिखूं या दूरी का अहसास लिखूं.

मैं अंधे के दिन मैं झाकूँ या आँखों की मैं रात लिखूं.
मीरा की पायल को सुन लून या गौतम की मुस्कान लिखूं.

बचपन मैं बच्चों से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूं.
सागर सा गेहरा हो जौन या अंबार का विस्तार लिखूं.

वो पहेली पहेली प्यास लिखूं या निस्छल पहेला प्यार लिखूं.
सावन की बारिश मैं भीगूं या आँखों की मैं बरसात लिखूं.

गीता का अर्जुन हो जौन या लंका रावण राम लिखूं.
मैं हिंदू मस्लिन हो जाउ या बेबस सा इंसान लिखूं.

मैं एक ही मज़हब को जी लून या मज़हब की आँखें चार लिखूं.
कुछ जीत लिखूं या हार लिखूं,या दिल का सारा प्यार लिखूं.

इंतज़ार

                                                                पल जब इंतज़ार का हो  कुछ इस तरह इंतज़ार करना जैसे जहां में तेरे लिए बस मैं ही ...