Monday, December 31, 2018

Nav Varsh Vishesh


दोस्तों २०१९ की पूर्व संध्या पर कुछ लाइन्स प्रस्तुत की हैं काफी दिन बाद .....
happy New Year 2019


बीते वर्ष में बहुत कुछ खोया बहुत कुछ पाया .
एक बार फिर से नया वर्ष २०१९ आया
उमंग नयी होगी उल्लास नए होंगे
सपनें नए होंगे अपने वही होंगे
रिक्वेस्ट आप से यही है आप यूँ  ही रहना
नए मुकामों को यूँ ही पाते रहना
दुआ करते  हैं हर पल आपका सुहावना हो
मंजिल मिलती रहे कभी आपको भय ना हो
इस नव वर्ष में यही कहूंगा
जीवन में आप खुश रहोगे तो मैं खुश रहूंगा
नव वर्ष की हार्दिक बधाई ......

सिद्धांत प्रताप सिंह
नई दिल्ली भारत


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Friday, August 17, 2018

Mujhe Yaad Karna.....

जब तुम तन्हा हो जाओ, तब मुझे याद करना,
जब तुम इतने ख़ूबसूरत न रहो, तब मुझे याद करना,
जब तुम्हारी मुस्कान की कोई तारीफ न करे, तब मुझे याद करना,
जब तुम ज़िन्दगी से परेशान हो जाओ, तब मुझे याद करना,
जब तुम अपना सारा प्यार लुटा दो और तुम्हे प्यार न मिले, तब मुझे याद करना,
जब तुम दूसरो की खुशियों के लिए अपने खुशियों को कुर्बान कर दो, तब मुझे याद करना,
जब तुम्हारी चाहतों को कोई समझने वाला न हो, तब मुझे याद करना,
तब भी मैं तुम्हे इतना ही प्यार करूँगा,
तुम्हारी मुस्कान के खातिर खुद को गिरवी रख दूँगा.
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Sunday, March 11, 2018

रिश्ते क्या हैं नहीं पता ......

अक्सर रिश्तों को रोते हुए देखा है, 
अपनों की ही बाँहो में मरते हुए देखा है
टूटते, बिखरते, सिसकते, कसकते 
रिश्तों का इतिहास, 
दिल पे लिखा है बेहिसाब! 
प्यार की आँच में पक कर पक्के होते जो, 
वे कब कौन सी आग में झुलसते चले जाते हैं,
झुलसते चले जाते हैं और राख हो जाते हैं! 
क्या वे नियति से नियत घड़ियाँ लिखा कर लाते हैं?
कौन सी कमी कहाँ रह जाती है 
कि वे अस्तित्वहीन हो जाते हैं, 
या एक अरसे की पूर्ण जिन्दगी जी कर,
वे अपने अन्तिम मुकाम पर पहुँच जाते हैं! 
मैंने देखे हैं कुछ रिश्ते धन-दौलत पे टिके होते हैं,
कुछ चालबाजों से लुटे होते हैं-गहरा धोखा खाए होते हैं 
कुछ आँसुओं से खारे और नम हुए होते हैं,
कुछ रिश्ते अभावों में पले होते हैं- 
पर भावों से भरे होते है! बड़े ही खरे होते हैं ! 
कुछ रिश्ते, रिश्तों की कब्र पर बने होते हैं,
जो कभी पनपते नहीं, बहुत समय तक जीते नहीं 
दुर्भाग्य और दुखों के तूफान से बचते नहीं!
स्वार्थ पर बनें रिश्ते बुलबुले की तरह उठते हैं 
कुछ देर बने रहते हैं और गायब हो जाते हैं; 
कुछ रिश्ते दूरियों में ओझल हो जाते हैं,
जाने वाले के साथ दूर चले जाते हैं ! 
कुछ नजदीकियों की भेंट चढ़ जाते हैं,
कुछ शक से सुन्न हो जाते हैं ! 
कुछ अतिविश्वास की बलि चढ़ जाते हैं! 
फिर भी रिश्ते बनते हैं, बिगड़ते हैं, 
जीते हैं, मरते हैं, लड़खड़ाते हैं, लंगड़ाते हैं
तेरे मेरे उसके द्वारा घसीटे जाते हैं,
कभी रस्मों की बैसाखी पे चलाए जाते हैं!

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पर कुछ रिश्ते ऐसे भी हैं 
जो जन्म से लेकर बचपन जवानी - बुढ़ापे से गुजरते हुए,
बड़ी गरिमा से जीते हुए महान महिमाय हो जाते हैं ! 
ऐसे रिश्ते सदियों में नजर आते हैं ! 
जब कभी सच्चा रिश्ता नजर आया है
कृष्ण की बाँसुरी ने गीत गुनगुनाया है! 
आसमां में ईद का चाँद मुस्कराया है! 
या सूरज रात में ही निकल आया है! 
ईद का चाँद रोज नहीं दिखता,
इन्द्रधनुष भी कभी-कभी खिलता है! 
इसलिए शायद - प्यारा खरा रिश्ता 
सदियों में दिखता है, मुश्किल से मिलता है पर, 
दिखता है, मिलता है, यही क्या कम है .. !!!

Thursday, March 8, 2018

Woman's Day Vishesh...

आज की बिटिया कल की नारी है। वही इंदिरा, दुर्गा, लक्ष्मी, किरन, अन्नपूर्णा और जग कल्याणी है। इनकी अपनी अलग कहानी है, बिटिया के जन्म का उत्सव मनाओ। पढ़ा-लिखाकर उसे काबिल बनाओ॥ बेटा-बिटिया में भेद-भाव करना सरासर अन्याय है, इसी भेद-भाव के कारण तो आज इनका घटता अनुपात है। उनमें से तो कुछ चढ़ा दी जाती है, दहेज की बलि, कुछ कुपोषण के कारण खिलने से पूर्व ही मुरझाती है कली, कुछ होती जा रही हैं दुराचार और शोषण की शिकार॥ Image result for women's day यदि ऐसे ही घटता रहा इनका अनुपात, तो घर-परिवार और देश को चलाएगा कौन? सोचो ज़रा सब तरफ बढ़ेगा अत्याचार और बलात्कार। जैसे एक पहिए से गाड़ी नहीं चल पाएगी, वैसे ही नारी के बिना क्या यह दुनिया चल पाएगी? जैसे नल होगा बिना पानी के , वैसे ही नर रहेगा बिना नारी के। नारी ही तो है जन-जन की जननी, वही रखती ख्याल सबका दिन-रात॥ नारी ही तो चलाती है, घर, समाज, देश और संसार। नारी से बढ़कर कोई नहीं, इनकी महिमा अपरंपार॥ जहाँ इनको मिलता है सम्मान, वहीं रमते हैं श्री भगवान। हर जन, समाज, और सरकार से है विनती हमारी। लड़कियों को सबल बनाएँ, और दें इन्हें सुविधाएँ सारी॥ पढ़ी-लिखी बालिका पर ही टिकी हैं, परिवार, समाज और देश की उम्मीदें सारी। घर-घर में होता है दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का अवतार, यह कथा नहीं सच्चाई है, इसे स्वीकारने से मत करें इनकार॥ इस धरती को स्वर्ग बनाओ, बिटिया को सँवारो, पढ़ाओ और सबल बनाओ। बिटिया के जन्म का उत्सव मनाओ, पढ़ा-लिखाकर उसे काबिल बनाओ॥


Saturday, March 3, 2018

Dil ka khayal-001

Khayal Tear Muskurahat Lata hai,
Teri Aashqui me doob jane ka dil chahta hai,
Afosos nhi hoga agar tujhe paa na Saka,
Khush rhunga humesa ki mujhe bhi koi chahta tha.....


Zindagi Nirali Hai kyunki ye har sama ki deewani hai,
Chahat kashish aur pyar mohabbat hote hai ek dhage ki tarah,
toot jaye to nhi jud nhi sakte kabhi,
Par majboot ho jaye to Koi tod nhi sakta...

Meri chahat ki deewangi humesa fikr se nhi hoti,
Waqt k sath zindagi humesa bhi buri nhi hoti,
Paa lunga mai ek din apne us mukaam ko jiski chahat hai,
Kyunki dillagi ki kbhi kbhi alag entry bhi hoti hai,

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Junoon ho agar kuch paane ka,
waqt ho agar kuch ban k dikhane ka,
Kosis kro tum kar jaoge ,
Saari duniya se lad jaoge ,
waqt bewaqt hi shi ek din tum bhi mahan kahlaoge,
koi nhi harata iss duniya me sab jeet k baajigar hote hain,
badho aur badhte rho duniya ko kuch naya do,
Salam na kre agar koi tumko to phir kho,
bus mehnat ki ek acchi kosis ho,
waqt ki bhi ek acchi frequency ho,
electric jaisi sakti jo ayegi,
to khud hi zindai ki light jal jayegiiiiii


Friday, February 23, 2018

Maafiiiiiii................

रूठे हुए हो तुम मुझसे
हाँ,,रूठना तुम्हारा जायज हे
क्योंकि गलती थी मेरी ,,अपनी
गलती पे मैं शर्मिंदा हूँ

पर सारी गलती मेरी तो नहीं
क्योंकि,,बात तुमने मेरी सुनी नहीं
उस अनसुनी बात पर
बिछुड़े रहे हम दोनों

कोई तो तेरी भी मजबूरी रही होगी
दिल तो चाहता था तेरा भी मुझसे मिलना
पेरों में तेरे कोई तो जंजीर पड़ी
होगी किसी रिश्ते की

आज दिलों मे  दर्द हे
तेरे भी ,,मेरे भी
पर हम मिले कैसे
प्रश्न;; हम दोनों के
बीच में हे बस ये ही

जब समय ने सुनी पूरी बात
नमकीन पानी सा उसके भी
गालों  पे यहाँ वहां  बह  गया

समुन्द्र था जो ठहरा आखों में मेरी
हाथों में उसके बह गया ,,एक दुसरे
को चुप कराने की कोशिश में
हम दोनों ही रो पड़े

शब्द तो हमारे दरम्यान ना थे
ख़ामोशी में उस अँधेरे  में
दोनों रोते -रोते सो गये

देख रहा था ख्बाव या था  नीदों में
ऐसालगा आवाज देकर
बुला रही थी तुम मुझे

शिकवे शिकायतें जब चालू  हुए
आंसू ना फिर रुकने को हुए
एक पतली सी लकीर
जो थी हमारे बीच वो हमारे
ही आंसुओं में बह गई

जो गांठ पड़ी थी हमारे बीच
वो दिलो से हमारे निकल गयी
देते थे जो हम एक दुसरे पे जान
क्यों हम दुश्मन किस बात पर हुए

जब तुमने सुनी मेरी पूरी बात
जब रखे मैंने अपने जज़्बात
वही पुरानी हंसी दोनों के
दिलो से निकल पड़ी

अपनी गलती की मांगी थी माफ़ी
और माफ़ी मांगी अपने बनाने वाले से
माफ़ उसने भी मुझको किया

जिसने करवाई थी मुझसे गलती
देख तू ही वो अब कहाँ रहा

गलती ना उसकी ना मेरी ना तेरी
यह सब समय का फेर था
समय ने ही जुदा किया हमको

समय आया तो समय ने ही
एक दुसरे  से हमे जोड़ा
हम तो कठपुतली तीनो बने
करने वाला तो कोई और था

यह कोई शायरी नहीं
ना ही कोई कविता है
माफीनामा है प्यार भरा
पढकर शायद वो माफ़ करे मुझको
यह मेरा उसके लिए
प्यार भरा माफीनामा

Thursday, February 8, 2018

Maaa Par kuch lines...

जीवन की शुरुआत हैं माँ,
हर लम्हे में साथ हैं माँ,
खुशियों की बरसात हैं माँ,
डूबती नैया की पतवार हैं माँ,
प्यार करे तो दुर्गा हैं माँ,
गुस्सा करे तो काली हैं माँ,
हर रूप है निराला उसका,
चाहे वो हो दुर्गा माँ,
चाहे वो हो काली माँ,
मानो तो भगवन हैं माँ,
ईश्वर का दिया वरदान है माँ......

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Tuesday, January 2, 2018

New Year 2018 Vishes Panktiyaan....

नये वर्ष की नयी सुबह
नयी कलम और नयी डायरी
काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि
मुग्ध हो जाएँ दुनिया सारी

खामोश जुबां के शब्द बनूं
टूटे सपनो के टुकड़े चुनूं
काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि
भटके अपनो की राह बुनूं

दीन-दुखी जन की पीड़ा
हर दिल तक पहुँचा पाऊँ
काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि
सबके दिल को छू जाऊँ

निर्बल का मान बचा पाऊँ
निर्धन की जान बचा पाऊँ
काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि
हर दिल को रोशन कर जाऊँ

जंग लगे दिल के दरवाजों
के तालों को तोड़ सकूँ
काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि
सबके दिलों को जोड़ सकूँ

झूठ का पर्दाफाश करूँ
और सच का मैं आगाज़ करूँ
काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि
सबके दिलों में राज करूँ

प्रकाश की सविता बन जाऊँ
आस की सरिता बन आऊँ
काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि
खुद ही कविता बन जाऊँ.....


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इंतज़ार

                                                                पल जब इंतज़ार का हो  कुछ इस तरह इंतज़ार करना जैसे जहां में तेरे लिए बस मैं ही ...