Wednesday, June 14, 2017

NA HO SATH TO

न हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुम
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।
सदा जो जगाये बिना ही जगा है
अँधेरा उसे देखकर ही भगा है।
वही बीज पनपा पनपना जिसे था
घुना क्या किसी के उगाये उगा है
अगर उग सको तो उगो सूर्य से तुम
प्रखरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥
सही राह को छोड़कर जो मुड़े
वही देखकर दूसरों को कुढ़े हैं।
बिना पंख तौले उड़े जो गगन में
न सम्बन्ध उनके गगन से जुड़े हैं
अगर बन सको तो पखेरु बनो तुम
प्रवरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥
न जो बर्फ की आँधियों से लड़े हैं
कभी पग न उसके शिखर पर पड़े हैं।
जिन्हें लक्ष्य से कम अधिक प्यार खुद से
वही जी चुराकर तरसते खड़े हैं।
अगर जी सको तो जियो जूझकर तुम
अमरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥

#geetganga

Tuesday, June 13, 2017

something new...

आपके सामने, मैं अकेले इस दुनिया चला गया,
कभी भी सबसे बड़ी अकेलापन ले जाना,
दया की प्रार्थना पत्थर से मेरा दिल बारी,
त्यागकर्ता द्वारा त्याग दिया जा रहा है

मेरी सारी शक्तियों के साथ मेरे दर्द को कैप्चर करना,
केवल रात के शांत में उन्हें मुक्त करने के लिए,
दृष्टि में कोई प्रकाश के साथ मनाया विचार,
मेरी किस्मत को स्वीकार करना मैंने लड़ाई छोड़ दी

निर्माता ने मेरे दिल पर दया की, उसने मुझे मुक्त कर दिया,
उसने मेरी रोता सुनकर मेरी सुनवाई सुनाई,
उसने मुझे सबसे बड़ा उपहार दिखाया, कभी भी हो सकता है,
अभिशाप को तोड़ दिया और मुझे एक पवित्र उपहार भेजा

तुम मेरी रात आसमान हो,
इस तरह की भावनाओं से मैं इनकार नहीं कर सकता,
अब मैं आभारी हूं कि मैं रोता हूं,
आप एक हैं जो मैं ईमानदारी से खड़े होंगे।

जब मैं आपकी आंखों में देखता हूं, तो मैं तुम्हारा प्यार महसूस कर सकता हूं,
मेरे खूबसूरत परी को ऊपर से भेजा गया,
आपका संरक्षक योद्धा जिसे मैंने सपना देखा था,
हमारे जैसे प्रेम कबूतर की तुलना में अधिक शुद्ध है......

Saturday, April 22, 2017

Aahistey chal...

जरा आहिस्ता चल जिन्दगी,
तुझे थोडा जी तो लूँ |

यूँ इम्तेहाँ पे इम्तेहाँ न ले,
तुझे थोडा परख तो लूँ |

तेरे हर पहलु को नजर भर देख लूँ,
थोडी ठहर जरा, तेरी खामोश नजरो के ईशारो से कुछ सीख लूँ |
कभी गिरती तु कभी सम्भलती,
फिर तेज रफ्तार से दोडती,
कभी तन्हा कभी अकेली,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |

कई रूप है तेरे कई रंग तेरे,
हसीनाओं से नखरे तेरे,
यूँ अकेली चलेगी कब तक,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |

मंद शीतल पवन सी तु,
कभी तुफाँ लिए अपने अन्दर,
निर्मल स्वच्छ चाँदनी सी तु,
कभी सूरज की तपन सी लगे,
बिखरी हुई है तु यहां वहां,
थोडी सी जरा तुझे संवार लूँ,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |

क्यों खोई है तु खयालों मे,
भविष्य की आशाओं मे,
जी लेने दे इनपलों को जो आज है,
कहीं कल की आघोश मे ये खो न जाये,
आ हाथ मेरा तु थाम ले,
चल मेरे साथ मे,
कि तेरी खुबसूरती को थोडा निखार लूँ,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |

jee lo,,....

तू जिंदगी को जी,
उसे समझने की कोशिश न कर
सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,
उसमे उलझने की कोशिश न कर
चलते वक़्त के साथ तू भी चल,
उसमे सिमटने की कोशिश न कर
अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले,
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे,
खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर
कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे,
सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर
जो मिल गया उसी में खुश रह,
जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर
रास्ते की सुंदरता का लुत्फ़ उठा,
मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर !

Wednesday, April 12, 2017

Baal Adhikaar.....

बच्चे जग की बडी नियामत

ऐसी भी क्या आई कयामत

इनके नन्हे-नन्हे हाथ

करते रहें काम दिन रात

जूठन मांजें जूठन खाएं

खेल कूद मस्ती को भुलाएं

कभी खडे हो सडक किनारे

माल बेचने लगें बेचारे

कभी करते ये जूते साफ़

ये कैसा इन संग इंसाफ़ ?

बेचें फ़ल पर खुद न खाएं

बोझा कंधों पर उठाएं

कभी भीख में हाथ बढाएं

खेतों में जा काम कराएं

कहां खो गया इनका बचपन ?

मरा हुआ क्यों इनका मन ?

भोलेपन पर भारी काम

बचपन में भी नहीं आराम

नींद चैन और खेल भी खोया

छुप-छुप कर ये कितना रोया

क्यों न किसी नें इनको जाना

प्यारा बचपन न पहचाना

स्कूल और दोस्तों से दूर

क्यों भाग्य इनका क्रूर

आओ मिल अभियान चलाएं

बाल-श्रम को जड से मिटाएं

खो न जाए इनका बचपन

न रोए कोई नन्हामन

भर जाए खुशियों से बचपन

दुनिया का अनमोल रत्न

खो न जाए बाल-मुस्कान

दबें नहीं इनके अरमान

आओ मिलकर करें विचार

इन बच्चों की सुनें पुकार

जीने का इन्हें भी अधिकार

न हो बचपन का तिरस्कार

गया बचपन न लौट के आए

आओ हम बचपन को बचाएं

बाल-श्रम को जड से मिटाएं

आओ मिल अभियान चलाएं

Thursday, March 23, 2017

मैंने ख़ुशी खरीद ली…

रुई का गद्दा बेच कर
मैंने इक दरी खरीद ली,
ख्वाहिशों को कुछ कम किया मैंने
और ख़ुशी खरीद ली ।
सबने ख़रीदा सोना
मैने इक सुई खरीद ली,
सपनो को बुनने जितनी
डोरी ख़रीद ली ।
मेरी एक खवाहिश मुझसे
मेरे दोस्त ने खरीद ली,
फिर उसकी हंसी से मैंने
अपनी कुछ और ख़ुशी खरीद ली ।
इस ज़माने से सौदा कर
एक ज़िन्दगी खरीद ली,
दिनों को बेचा और
शामें खरीद ली ।
शौक-ए-ज़िन्दगी कमतर से
और कुछ कम किये, 
फ़िर सस्ते में ही
“सुकून-ए-ज़िंदगी” खरीद ली ।

खुदा ये बचपन क्यों…

APne Bachpan K naam ye kavita sabko samarpit..

कोई नहीं डांटता किसी को मुझ पर प्यार नहीं आता,
अब वो स्कूल जाने के नाम पर बुखार नहीं आता…
सुबह सुबह आ जाते थे खेलने के लिए बुलाने,
अब तो मिलने को भी कोई यार नहीं आता..
वो पक्के रंग, वो पिचकारियां, वो गुलाल,
अब वो वैसा होली का त्यौहार नहीं आता…
वो करतब जमूरे के, वो साइकल चैम्पियन,
अब गली में कोई ऐसा फनकार नहीं आता…
वो जिद खिलोने की वो चॉकलेट के लिए लड़ना,
अब वो पापा की डांट माँ का इंकार नहीं आता…
वो होमवर्क के लिए मार वो टीचर से चुगली,
खुदा ये बचपन क्यों बार बार नहीं आता…!

चार लोग क्या कहेंगे…

doston ye kavita ek beti ki kwaahish k  naam se dedicate kar rha hu..

बेटी बोली -
माँ मैं क्रिकेटर बनूँगी,
सचिन की तरह रिकॉर्ड तोडूंगी !
माँ बोली -
आहिस्ता बोल सब हसेंगे,
और फिर चार लोग क्याकहेंगे !!
बेटी बोली –
माँ मैं बाबा का व्यापार चलाऊँगी,
छोटी सी दुकान से बड़ा दफ्तर बनाउंगी!
माँ बोली –
आहिस्ता बोल बाबा गुस्सा करेंगे,
और फिर चार लोग क्याकहेंगे !!
बेटी बोली –
तो माँ मैं नेता बन जाऊंगी,
देश की हालत में कुछतो सुधार लाऊंगी !
माँ बोली –
कुर्सी तक पहुँचने से पहले ही सब नोंच लेंगे,
और फिर चार लोग क्याकहेंगे !!
बेटी बोली –
तो माँ मैं क्या करूँ,
बस यूँहीं अपनी ख्वाहिशों को दफ़न करती रहूँ ?
माँ बोली –
बेटी तू शादी करले,
तेरे ससुराल वाले तुझसे खूब मोह जताएंगे !
बेटी बोली –
माँ झूठ न बोल,
ना छीन मुझसे मेरे ये पल अनमोल !
शादी करके मैं फंस जाऊंगी,
सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन कहाऊंगी !
तू कुछ कर ना पाएगी, बेटी परायी होते ही तेरे
हाथ बांध जायेंगे,
मेरे भी हाथ पति और बच्चों के मोह से बांध दिए
जायेंगे !
मेरे सारे सपने शादी के लिबास से दफ़न कर दिए
जायेंगे,
और फिर तेरे वो चार लोग भी मुझे न
बचा पाएंगे !!

Saturday, January 21, 2017

Pyar...ek lafj

कुछ जीत लिखूं या हार लिखूं,या दिल का सारा प्यार लिखूं.
कुछ अपनो के जज़्बात लिखूं या सपनो की सौगात लिखूं.

मैं खिलता सूरज आज लिखूं या चेहरा चाँद गुलाब लिखूं.
वो डूबते सूरज को देखूं या उगते फूल की साँस लिखूं.

वो पल मैं बीते साल लिखूं या सदियों लंबी रात लिखूं.
मैं तुमको अपने पास लिखूं या दूरी का अहसास लिखूं.

मैं अंधे के दिन मैं झाकूँ या आँखों की मैं रात लिखूं.
मीरा की पायल को सुन लून या गौतम की मुस्कान लिखूं.

बचपन मैं बच्चों से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूं.
सागर सा गेहरा हो जौन या अंबार का विस्तार लिखूं.

वो पहेली पहेली प्यास लिखूं या निस्छल पहेला प्यार लिखूं.
सावन की बारिश मैं भीगूं या आँखों की मैं बरसात लिखूं.

गीता का अर्जुन हो जौन या लंका रावण राम लिखूं.
मैं हिंदू मस्लिन हो जाउ या बेबस सा इंसान लिखूं.

मैं एक ही मज़हब को जी लून या मज़हब की आँखें चार लिखूं.
कुछ जीत लिखूं या हार लिखूं,या दिल का सारा प्यार लिखूं.

Monday, November 28, 2016

हैं ये कैसे पल...

क्यूँ पास होके भी दूर रहना चाहें
लेकिन वोह हर समय याद आये
क्यूँ चुप रह के भी कुछ कहना चाहे
लेकिन वोह दिल को समझ ही न पाये
हैं ये कैसे पल
क्यूँ कुछ बोलके भी ये लब चुप रहना चाहे
लेकिन मन चुपके से कुछ कह जाये
क्यूँ खुश होके भी आखें खारी होना चाहे
लेकिन वोह इस दर्द को महसूस ही ना कर पाये
हैं ये कैसे पल
क्यूँ साथ होके भी अकेला होना चाहे
लेकिन वोह हर ख़याल में करीब आये
क्यूँ सपना देख के भी मुस्कराना ना चाहे
लेकिन वोह हुमे अपना बना ही ना पाये
हैं ये कैसे पल
क्यूँ दिल में बसा के धड़कन को रोकना चाहे
लेकिन वोह सांस बनके वापस दिल धड़का जाये
क्यूँ बाहों में समा के भी अलविदा कहना चाहे
लेकिन वोह हमपे एतबार ही ना कर पाये
हैं ये कैसे पल
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क्यूँ इज़हार करके भी इंकार करना चाहे
लेकिन शब्दों में ये प्यार हम बयान ना कर पाये
क्यूँ प्यार करके भी जख्म देना चाहे
लेकिन दिल को रोने से भी हम रोक ना पाये
हैं ये कैसे पल
बदल दो इनको, मिटा दो इनको
नहीं चाहिए ऐसे पल
जो भुला दे तुमको
नहीं चाहिए ऐसे पल
जो रुला दे हमको.............

“वो लड़का…”

वो लड़का जो हंसता बहुत है, अंदर से थोड़ा टूटा होता है, दुनिया को मजबूत दिखाने में, खुद से ही रोज़ रूठा होता है। घर की उम्मीदों का बोझ ल...