मैं स्पष्ट अंतर ध्यान दें मानव परिवार में हममें से कुछ गंभीर हैं, कुछ कॉमेडी पर कामयाब रहे कुछ अपनी ज़िंदगी घोषित करते हैं सच profundity के रूप में, और दूसरों का दावा है कि वे वास्तव में जीते हैं वास्तविक वास्तविकता हमारी त्वचा की विविधताएं भ्रमित कर सकते हैं, ममता बनना, प्रसन्नता, भूरा और गुलाबी और बेज और बैंगनी, तन और नीले और सफेद मैंने सात समुद्रों पर रवाना किया है और हर देश में बंद कर दिया, मैंने दुनिया के चमत्कार देखा है अभी तक एक आम आदमी नहीं मुझे दस हजार महिलाएं हैं जेन और मैरी जेन कहा जाता है, लेकिन मैंने किसी भी दो को नहीं देखा है जो वास्तव में एक ही थे
मुस्कुराती ज़िन्दगानी का साज़ है,😘 लिखना मेरे जीवन का अदभुत एहसास है,😍 किस्मत में मेरे एक ही सबसे ज्यादा खास है,💓 वो दुनिया में सबसे अलग है जिसपर मुझे नाज़ है❣️❤️
Thursday, August 31, 2017
मानव परिवार
मैं स्पष्ट अंतर ध्यान दें मानव परिवार में हममें से कुछ गंभीर हैं, कुछ कॉमेडी पर कामयाब रहे कुछ अपनी ज़िंदगी घोषित करते हैं सच profundity के रूप में, और दूसरों का दावा है कि वे वास्तव में जीते हैं वास्तविक वास्तविकता हमारी त्वचा की विविधताएं भ्रमित कर सकते हैं, ममता बनना, प्रसन्नता, भूरा और गुलाबी और बेज और बैंगनी, तन और नीले और सफेद मैंने सात समुद्रों पर रवाना किया है और हर देश में बंद कर दिया, मैंने दुनिया के चमत्कार देखा है अभी तक एक आम आदमी नहीं मुझे दस हजार महिलाएं हैं जेन और मैरी जेन कहा जाता है, लेकिन मैंने किसी भी दो को नहीं देखा है जो वास्तव में एक ही थे
Tuesday, August 29, 2017
The Tide Rises, the Tide Falls
ज्वार उगता है, ज्वार गिर जाता है,
गोधूलि अंधेरे, कर्ल कॉल;
समुद्र-रेत नम और भूरे रंग के साथ-साथ
यात्री शहर की ओर बढ़ता है,
और ज्वार बढ़ जाता है, ज्वार गिर जाता है
अंधेरे छतों और दीवारों पर बैठ जाती है,
लेकिन समुद्र, अंधेरे में समुद्र;
छोटी लहरें, उनके नरम, सफेद हाथों से,
रेत में पैरों के निशान,
और ज्वार बढ़ जाता है, ज्वार गिर जाता है
सुबह टूटता है; उनके स्टालों में स्टीड्स
डाक टिकट के रूप में टिकट और पड़ोसी;
दिन रिटर्न, लेकिन कभी नहीं
तट पर यात्री लौटाता है,
और ज्वार बढ़ जाता है, ज्वार गिर जाता है..................
By- Henry Wadsworth Longfellow
B
Sunday, August 13, 2017
कुछ बातें हम से सुना कर......
कुछ बातें हम से सुना करो,
कुछ बातें हम से किया करो ।
मुझे दिल की बात बता दो तुम,
होंठ ना अपने सिया करो।
जो बात लबों तक ना आए,
वो आंखों से कह दिया करो।
कुछ बातें कहना मुश्किल है,
तुम चहरे से पढ़ लिया करो।
जब तनहा-तनहा होते हो,
आवाज मुझे तुम दिया करो।
हर धड़कन मेरे नाम करो,
हर सांस मुझको दिया करो।
जो खुशियां तेरी चाहत हैं,
मेरे दामन से चुन लिया करो।

कुछ बातें हम से किया करो ।
मुझे दिल की बात बता दो तुम,
होंठ ना अपने सिया करो।
जो बात लबों तक ना आए,
वो आंखों से कह दिया करो।
कुछ बातें कहना मुश्किल है,
तुम चहरे से पढ़ लिया करो।
जब तनहा-तनहा होते हो,
आवाज मुझे तुम दिया करो।
हर धड़कन मेरे नाम करो,
हर सांस मुझको दिया करो।
जो खुशियां तेरी चाहत हैं,
मेरे दामन से चुन लिया करो।
Wednesday, June 14, 2017
NA HO SATH TO
न हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुम
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।
सदा जो जगाये बिना ही जगा है
अँधेरा उसे देखकर ही भगा है।
वही बीज पनपा पनपना जिसे था
घुना क्या किसी के उगाये उगा है
अगर उग सको तो उगो सूर्य से तुम
प्रखरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥
अँधेरा उसे देखकर ही भगा है।
वही बीज पनपा पनपना जिसे था
घुना क्या किसी के उगाये उगा है
अगर उग सको तो उगो सूर्य से तुम
प्रखरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥
सही राह को छोड़कर जो मुड़े
वही देखकर दूसरों को कुढ़े हैं।
बिना पंख तौले उड़े जो गगन में
न सम्बन्ध उनके गगन से जुड़े हैं
अगर बन सको तो पखेरु बनो तुम
प्रवरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥
वही देखकर दूसरों को कुढ़े हैं।
बिना पंख तौले उड़े जो गगन में
न सम्बन्ध उनके गगन से जुड़े हैं
अगर बन सको तो पखेरु बनो तुम
प्रवरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥
न जो बर्फ की आँधियों से लड़े हैं
कभी पग न उसके शिखर पर पड़े हैं।
जिन्हें लक्ष्य से कम अधिक प्यार खुद से
वही जी चुराकर तरसते खड़े हैं।
अगर जी सको तो जियो जूझकर तुम
अमरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥
कभी पग न उसके शिखर पर पड़े हैं।
जिन्हें लक्ष्य से कम अधिक प्यार खुद से
वही जी चुराकर तरसते खड़े हैं।
अगर जी सको तो जियो जूझकर तुम
अमरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥
#geetganga
Tuesday, June 13, 2017
something new...
आपके सामने, मैं अकेले इस दुनिया चला गया,
कभी भी सबसे बड़ी अकेलापन ले जाना,
दया की प्रार्थना पत्थर से मेरा दिल बारी,
त्यागकर्ता द्वारा त्याग दिया जा रहा है
मेरी सारी शक्तियों के साथ मेरे दर्द को कैप्चर करना,
केवल रात के शांत में उन्हें मुक्त करने के लिए,
दृष्टि में कोई प्रकाश के साथ मनाया विचार,
मेरी किस्मत को स्वीकार करना मैंने लड़ाई छोड़ दी
निर्माता ने मेरे दिल पर दया की, उसने मुझे मुक्त कर दिया,
उसने मेरी रोता सुनकर मेरी सुनवाई सुनाई,
उसने मुझे सबसे बड़ा उपहार दिखाया, कभी भी हो सकता है,
अभिशाप को तोड़ दिया और मुझे एक पवित्र उपहार भेजा
तुम मेरी रात आसमान हो,
इस तरह की भावनाओं से मैं इनकार नहीं कर सकता,
अब मैं आभारी हूं कि मैं रोता हूं,
आप एक हैं जो मैं ईमानदारी से खड़े होंगे।
जब मैं आपकी आंखों में देखता हूं, तो मैं तुम्हारा प्यार महसूस कर सकता हूं,
मेरे खूबसूरत परी को ऊपर से भेजा गया,
आपका संरक्षक योद्धा जिसे मैंने सपना देखा था,
हमारे जैसे प्रेम कबूतर की तुलना में अधिक शुद्ध है......
Saturday, April 22, 2017
Aahistey chal...
जरा आहिस्ता चल जिन्दगी,
तुझे थोडा जी तो लूँ |
यूँ इम्तेहाँ पे इम्तेहाँ न ले,
तुझे थोडा परख तो लूँ |
तेरे हर पहलु को नजर भर देख लूँ,
थोडी ठहर जरा, तेरी खामोश नजरो के ईशारो से कुछ सीख लूँ |
कभी गिरती तु कभी सम्भलती,
फिर तेज रफ्तार से दोडती,
कभी तन्हा कभी अकेली,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |
कई रूप है तेरे कई रंग तेरे,
हसीनाओं से नखरे तेरे,
यूँ अकेली चलेगी कब तक,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |
मंद शीतल पवन सी तु,
कभी तुफाँ लिए अपने अन्दर,
निर्मल स्वच्छ चाँदनी सी तु,
कभी सूरज की तपन सी लगे,
बिखरी हुई है तु यहां वहां,
थोडी सी जरा तुझे संवार लूँ,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |
क्यों खोई है तु खयालों मे,
भविष्य की आशाओं मे,
जी लेने दे इनपलों को जो आज है,
कहीं कल की आघोश मे ये खो न जाये,
आ हाथ मेरा तु थाम ले,
चल मेरे साथ मे,
कि तेरी खुबसूरती को थोडा निखार लूँ,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |
तुझे थोडा जी तो लूँ |
यूँ इम्तेहाँ पे इम्तेहाँ न ले,
तुझे थोडा परख तो लूँ |
तेरे हर पहलु को नजर भर देख लूँ,
थोडी ठहर जरा, तेरी खामोश नजरो के ईशारो से कुछ सीख लूँ |
कभी गिरती तु कभी सम्भलती,
फिर तेज रफ्तार से दोडती,
कभी तन्हा कभी अकेली,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |
कई रूप है तेरे कई रंग तेरे,
हसीनाओं से नखरे तेरे,
यूँ अकेली चलेगी कब तक,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |
मंद शीतल पवन सी तु,
कभी तुफाँ लिए अपने अन्दर,
निर्मल स्वच्छ चाँदनी सी तु,
कभी सूरज की तपन सी लगे,
बिखरी हुई है तु यहां वहां,
थोडी सी जरा तुझे संवार लूँ,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |
क्यों खोई है तु खयालों मे,
भविष्य की आशाओं मे,
जी लेने दे इनपलों को जो आज है,
कहीं कल की आघोश मे ये खो न जाये,
आ हाथ मेरा तु थाम ले,
चल मेरे साथ मे,
कि तेरी खुबसूरती को थोडा निखार लूँ,
थोडी ठहर जरा,
मैं भी तेरे साथ हो लूँ |
jee lo,,....
तू जिंदगी को जी,
उसे समझने की कोशिश न कर
उसे समझने की कोशिश न कर
सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,
उसमे उलझने की कोशिश न कर
उसमे उलझने की कोशिश न कर
चलते वक़्त के साथ तू भी चल,
उसमे सिमटने की कोशिश न कर
उसमे सिमटने की कोशिश न कर
अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले,
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे,
खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर
खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर
कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे,
सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर
सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर
जो मिल गया उसी में खुश रह,
जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर
जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर
रास्ते की सुंदरता का लुत्फ़ उठा,
मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर !
मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर !
Wednesday, April 12, 2017
Baal Adhikaar.....
बच्चे जग की बडी नियामत
ऐसी भी क्या आई कयामत
इनके नन्हे-नन्हे हाथ
करते रहें काम दिन रात
जूठन मांजें जूठन खाएं
खेल कूद मस्ती को भुलाएं
कभी खडे हो सडक किनारे
माल बेचने लगें बेचारे
कभी करते ये जूते साफ़
ये कैसा इन संग इंसाफ़ ?
बेचें फ़ल पर खुद न खाएं
बोझा कंधों पर उठाएं
कभी भीख में हाथ बढाएं
खेतों में जा काम कराएं
कहां खो गया इनका बचपन ?
मरा हुआ क्यों इनका मन ?
भोलेपन पर भारी काम
बचपन में भी नहीं आराम
नींद चैन और खेल भी खोया
छुप-छुप कर ये कितना रोया
क्यों न किसी नें इनको जाना
प्यारा बचपन न पहचाना
स्कूल और दोस्तों से दूर
क्यों भाग्य इनका क्रूर
आओ मिल अभियान चलाएं
बाल-श्रम को जड से मिटाएं
खो न जाए इनका बचपन
न रोए कोई नन्हामन
भर जाए खुशियों से बचपन
दुनिया का अनमोल रत्न
खो न जाए बाल-मुस्कान
दबें नहीं इनके अरमान
आओ मिलकर करें विचार
इन बच्चों की सुनें पुकार
जीने का इन्हें भी अधिकार
न हो बचपन का तिरस्कार
गया बचपन न लौट के आए
आओ हम बचपन को बचाएं
बाल-श्रम को जड से मिटाएं
आओ मिल अभियान चलाएं
ऐसी भी क्या आई कयामत
इनके नन्हे-नन्हे हाथ
करते रहें काम दिन रात
जूठन मांजें जूठन खाएं
खेल कूद मस्ती को भुलाएं
कभी खडे हो सडक किनारे
माल बेचने लगें बेचारे
कभी करते ये जूते साफ़
ये कैसा इन संग इंसाफ़ ?
बेचें फ़ल पर खुद न खाएं
बोझा कंधों पर उठाएं
कभी भीख में हाथ बढाएं
खेतों में जा काम कराएं
कहां खो गया इनका बचपन ?
मरा हुआ क्यों इनका मन ?
भोलेपन पर भारी काम
बचपन में भी नहीं आराम
नींद चैन और खेल भी खोया
छुप-छुप कर ये कितना रोया
क्यों न किसी नें इनको जाना
प्यारा बचपन न पहचाना
स्कूल और दोस्तों से दूर
क्यों भाग्य इनका क्रूर
आओ मिल अभियान चलाएं
बाल-श्रम को जड से मिटाएं
खो न जाए इनका बचपन
न रोए कोई नन्हामन
भर जाए खुशियों से बचपन
दुनिया का अनमोल रत्न
खो न जाए बाल-मुस्कान
दबें नहीं इनके अरमान
आओ मिलकर करें विचार
इन बच्चों की सुनें पुकार
जीने का इन्हें भी अधिकार
न हो बचपन का तिरस्कार
गया बचपन न लौट के आए
आओ हम बचपन को बचाएं
बाल-श्रम को जड से मिटाएं
आओ मिल अभियान चलाएं
Thursday, March 23, 2017
मैंने ख़ुशी खरीद ली…
रुई का गद्दा बेच कर
मैंने इक दरी खरीद ली,
ख्वाहिशों को कुछ कम किया मैंने
और ख़ुशी खरीद ली ।
मैंने इक दरी खरीद ली,
ख्वाहिशों को कुछ कम किया मैंने
और ख़ुशी खरीद ली ।
सबने ख़रीदा सोना
मैने इक सुई खरीद ली,
सपनो को बुनने जितनी
डोरी ख़रीद ली ।
मेरी एक खवाहिश मुझसे
मेरे दोस्त ने खरीद ली,
फिर उसकी हंसी से मैंने
अपनी कुछ और ख़ुशी खरीद ली ।
इस ज़माने से सौदा कर
एक ज़िन्दगी खरीद ली,
दिनों को बेचा और
शामें खरीद ली ।
शौक-ए-ज़िन्दगी कमतर से
और कुछ कम किये,
फ़िर सस्ते में ही
“सुकून-ए-ज़िंदगी” खरीद ली ।
मैने इक सुई खरीद ली,
सपनो को बुनने जितनी
डोरी ख़रीद ली ।
मेरी एक खवाहिश मुझसे
मेरे दोस्त ने खरीद ली,
फिर उसकी हंसी से मैंने
अपनी कुछ और ख़ुशी खरीद ली ।
इस ज़माने से सौदा कर
एक ज़िन्दगी खरीद ली,
दिनों को बेचा और
शामें खरीद ली ।
शौक-ए-ज़िन्दगी कमतर से
और कुछ कम किये,
फ़िर सस्ते में ही
“सुकून-ए-ज़िंदगी” खरीद ली ।
खुदा ये बचपन क्यों…
APne Bachpan K naam ye kavita sabko samarpit..
कोई नहीं डांटता किसी को मुझ पर प्यार नहीं आता,
अब वो स्कूल जाने के नाम पर बुखार नहीं आता…
सुबह सुबह आ जाते थे खेलने के लिए बुलाने,
अब तो मिलने को भी कोई यार नहीं आता..
अब वो स्कूल जाने के नाम पर बुखार नहीं आता…
सुबह सुबह आ जाते थे खेलने के लिए बुलाने,
अब तो मिलने को भी कोई यार नहीं आता..
वो पक्के रंग, वो पिचकारियां, वो गुलाल,
अब वो वैसा होली का त्यौहार नहीं आता…
वो करतब जमूरे के, वो साइकल चैम्पियन,
अब गली में कोई ऐसा फनकार नहीं आता…
वो जिद खिलोने की वो चॉकलेट के लिए लड़ना,
अब वो पापा की डांट माँ का इंकार नहीं आता…
वो होमवर्क के लिए मार वो टीचर से चुगली,
खुदा ये बचपन क्यों बार बार नहीं आता…!
अब वो वैसा होली का त्यौहार नहीं आता…
वो करतब जमूरे के, वो साइकल चैम्पियन,
अब गली में कोई ऐसा फनकार नहीं आता…
वो जिद खिलोने की वो चॉकलेट के लिए लड़ना,
अब वो पापा की डांट माँ का इंकार नहीं आता…
वो होमवर्क के लिए मार वो टीचर से चुगली,
खुदा ये बचपन क्यों बार बार नहीं आता…!
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